हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली’, CM साय का बड़ा बयान

बोले- हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक, बस्तर अब भय नहीं बल्कि शांति और विकास की राह पर
रायपुर, 31 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा और तीखा बयान दिया है। एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुख्यात नक्सली हिड़मा को आदर्श मानने वाले लोग ही ‘दिमागी नक्सली’ हैं। उन्होंने कहा कि हिड़मा जैसे नक्सलियों ने सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान ली और ऐसे लोगों को नायक के तौर पर पेश करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकल रहा है। सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से प्रदेश नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की ओर बढ़ चुका है। अब जरूरत सिर्फ जंगलों में चल रही हिंसा को खत्म करने की नहीं, बल्कि हिंसा को वैचारिक समर्थन देने वाली मानसिकता को भी समाज से बाहर करने की है।
‘हिंसा करने वाला किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता’
सीएम साय ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के जरिए बस्तर की कई पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में जीने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता।
बस्तर ने चुकाई नक्सल हिंसा की भारी कीमत
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सली हिंसा के कारण बस्तर ने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और सुरक्षाबलों के जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाएं दशकों तक प्रभावित रहीं।
उन्होंने कहा कि इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना उन परिवारों के दर्द और शहीद जवानों के बलिदान का अपमान है।
‘लोकतंत्र में असहमति का अधिकार, लेकिन हिंसा का समर्थन नहीं’
सीएम साय ने कहा कि नक्सलवाद की चुनौती केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित नहीं है। हिंसा को सही ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक बनाने वाली सोच भी गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन निर्दोष लोगों की हत्या और हिंसा का समर्थन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
बदल रही है बस्तर की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की पहचान तेजी से बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के लिए जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं के लिए शिक्षा व रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
दूरस्थ गांवों को भी शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
‘बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब और रोजगार चाहते हैं’
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर का युवा अब हिंसा का रास्ता नहीं चाहता। वह किताब, कलम, कौशल और रोजगार के जरिए अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और हर परिवार तक विकास एवं सुशासन का लाभ पहुंचे।
‘नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी’
सीएम साय ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। सुरक्षाबलों के जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है।
अब समाज की भी जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दिया जाए।
‘नए छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के लिए कोई जगह नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब शांति, लोकतंत्र और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ चुका है। नए छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के जरिए समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाकर बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
